माँ शक्ति के आगमन से 

वातावरण जैसे शुद्ध है।

मन को स्वयं अंदर से

प्रेममय कर शुद्ध करें।


श्रद्धा की असीम उमंग है,

भक्ति का गहरा छाया रंग है,

चढ़ा सब पे नया तरंग है,

निर्मल तन मन हो,

है यहीं प्रार्थना।


चहुँ ओर वात्सल्य का

फैला रस है।

स्नेह ममता में सराबोर

चैतन्य है।

चरणों में माँ के

सुख अथाह सागर है।


इस पुनीत पर्व में सीखें

प्रेम सद्भावना।

त्याज्य द्वेष घृणा ईर्ष्या

करें सबकी मंगल कामना।

विश्व शांति की मिलकर

करें पावन कामना।

करें नारी का सम्मान सदा

सीखें देवी पूजन से ये भावना।