अक्सर ख़ामोशी में जो ढेर सारी बातें करें, ऐसा तार ढूँढता है दिल।
सूनी सूनी आँगन को तरानों से सजाए, ऐसी हो कही कोई महफ़िल।
अल्फ़ाज़ों से ना, रिश्तों से ना, मन से मन का हो बस संगम।
बिन कुछ कहे, जो सब समझे, ऐसा हो संग कोई हमदम।
हर पल साँसों में राग बना कर रखे,
भूली बिसरी यादों का ताज बना कर रखे,
आभूषण से नई, शब्दों से जो तन सजाए, ऐसा अलंकार ढूँढता है दिल।
किसी कोने में हो सूरों से भारी दुनिया, ऐसा दिखे कहीं कोई झिलमिल।
अक्सर ख़ामोशी में जो ढेर सारी बातें करें, ऐसा तार ढूँढता है दिल।
