बस कर्म करो तुम आज अभी

यह आज अभी तक गया नहीं

संदेह ना करना तुम खुद पर

इस दुनिया ने क्या किया नहीं

खुद परखेगा तू अपने आप को

तुझे परखे, ऐसा सुनार नहीं

तुम में भी है हीरे की खान 

तुम कोई कचरे का ढेर नहीं

इक साँस भरो तुम गहरी सी

क्या और किसी ने जिया नहीं

सब तुमको भी ताने देंगे पर

क्या और किसी ने सहा नहीं

आदत डालो तुम बहने की 

इन भँवरो में तुम फँसो नहीं

शमा भी बुझेगा तेरे बरसने से 

बहते नैनो का तू ,नीर नहीं

पीना होगा विष तुझे कभी 

क्या शिव शंकर ने पिया नहीं

ना बच पाए षड्यंत्रों से 

ऐसा चक्रव्यूह किसी ने रचा नहीं



Jaiswalkhushi