लहरों से भी ऊपर उछाल, अंगारो से हो जा तू पार ।

तू हो तैयार.....

जब अहिंसा का हो दुर्व्यवहार, और हिंसा का हो चरम पार।

तू कर प्रहार.....

ये अधर्म राग के प्राणी को , तू नतमस्तक़़ होने दे आज ।

तू कर साकार...

सत्य नारी का तू कर सम्मान , नव जीवन का हो सत्य आधार ।

तू कर सुधार...

हाँ धर्म कर्म से बंध जा तू , और भाव रख तू परोपकार ।

तू कर प्रचार..

दिल से दिल का तू कर मिलाप , हर धड़कन में हो धर्म निवास ।

हाँ धर्म निवास..

विश्व गुरू भारत को प्रणाम , शत्रु का करने को संहार ।

ले प्रतिकार ..

फिर से होगा उदय नया सूर्य , जब अज्ञानता का होगा अंधकार।

 कर आविष्कार...

Jaiswalkhushi