कभी कांटे भले हीं चुभे हों उसे , पर दिल में उसके पलाश हो,
आंधियों को सामने देख कर भी वो कभी ना होता हताश हो ,
गिरकर संभलना ही नहीं , संभालने का भी हुनर उसके पास हो ।
कहीं तो बढ़ ही रहा होगा पीछे अकेले वो अपने सफ़र में पीछे क़दमों के निशां छोड़ते ।
निशां ढूंढने दो मुझे , शायद निशां से ही पूरी मेरी तलाश हो ।


