तुम्हें लगता है ना , मैं तुम्हें भूल गई हूं ?
है ना ?
आज भी मैं तुम्हें तुमसे बेहतर समझती हूं ,
मैंने तुम्हारी आंखों से , तुम्हारे भीतर के आग को मौन में बदलते देखा है ।
ज़िद की आड़ से निकलो , मेरी आंखों ने देखो ना
महसूस तुम भी करोगे ,
कुछ चीज़े कभी नहीं बदलती।


