अगर तुम मेरी चाहत हो
एक दफा नहीं
दो दफा नहीं, सौ दफा मै तुमसे इज़हार करूंगी ।
अगर तुम मेरी ज़िद हो
मै महज़ तुम्हें हासिल करने की हर कोशिश करूंगी ।
मसला तो इश्क़ का बन जाता है
जहां मै तुमसे इज़हार भी नहीं करूंगी , ना ही तुम्हें हासिल करना चाहूंगी ,
मगर तुम्हारे मेरे पास आने का इंतज़ार मैं सिर्फ इसी इश्क़ में करूंगी ।


