ज़रा सी मुस्कुराहट लबों पर उनकी और चेहरा चांद सा निखर-निखर गया, बरसों से सूखे पड़े थे चश्म आज पल में भर भर गया, कहती थी खामोश निगाहें जिनकी दर्द जो सितमगर दे गया, आज लबों ने ज़रा सी हरकत की और दस्तक खिज़ा में बहार दे गया।।।।