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हाल-ए-दिल


हाल-ए-दिल किसी रकीब से पूछिए किन मुश्किलों से गुज़र रहा हूँ मैं, कोई जाते हुए बता गया है मुझको कि फासले बढ़ा रहा हूँ मैं...! जो कहते थे पत्थर दिल मुझको देखा है कब मुडकर उसने कि कैसे मोम सा अहिस्ता अहिस्ता पिगल रहा हूँ मैं...!

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