अज़ीज़ के शेर
वो बेजुबां सही मगर अहसास उन्हें भी है,
प्यार कहते है जिसे उसकी चाह उन्हें भी है ।
मेरी शायरियां ढूंढती है मंजिल अपनी,
गजले मेरी मंजिल का रास्ता देखे,
वो जिन्हे हम अपने शब्दो का मफहुन बनाते है,
काश वो हमारे शब्दो का जुनून देखे ।
कभी अरदास कभी मन्नत कभी दुआ तो कभी पूजा कहता हूं,
मैं जिस दर पर जाता हूं वैसा रहता हूं,
दुनिया में होंगे बेशक बहुत से दर अज़ीज़,
वो सच्चा रब एक है मैं जिस दर पर रहता हूं ।

