कविता - युगल
 कवि - जोत्सना जरीक


 .
 वो नीली नदी
 पास मत जाओ
 धीरे-धीरे नीला हो जाना
 सफेद हो जाएगा।
 मेरा खून गुलाब
 इस तरह   बदलते दिन
 उस रंग को मत बदलो
 रहस्य अकेले रखें
 जो कुछ भी है मेरा
 फिर छुप-छुप कर खेलें
 प्रकाश एवम् छाया
 स्वीकार करेंगे
 गुणी महिला के आंसू में
 बह जाएगा
 कुछ अनसुना
 गाने की धुन...



 
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