मत बिस्वास करै मेरी मैय्या, गोपियाँ विकट सयानीं।

आवत जावत छेड़त मोकू, रचतीं उलट कहानीं।।

मत बिस्वास..........

देखत राहिन छेड़त मोकू, क्या बतलाऊं मय्या तोकू।

भागत पीछे मैं भागूं तो, इनको नाहिं डर काहू को।।

मांगति प्रेम निशानी.

मत बिस्वास............

कहतीं बस जा ह्रदय कन्हियां, काहे दुख देवत है।

हाथ न आऊं तो कहती हैं जग सूना तुझ बिन है।।

विषम समस्या नहीं समाधान, रोतीं भर भर पानी.

मत बिस्वास करै मेरी मैय्या, गोपियाँ विकट सयानीं।

आवत जावत छेड़त बैरिन, रचतीं उलट कहानीं।।

                           कवि खजान सिंह "वायुसैनिक"