भीड़ लगी थी चौराहे पे
देखा तो किसी का पुतला फूंका जा रहा है
आक्रोश के नाम पे लोग हस रहे थे
फ़ोटो खिचाने को तरस रहे थे
पोज़ सबने भयानक सा बना लिया
अब ख़बर छपेगी सबने जश्न बना लिया
इतनी नफ़रत, इतना दिखावा क्यों हो रहा है
कोई मानसिक तनाव है या कोई अंदरूनी पीड़ा से कुछ भोग रहा है
कभी किसी के नाम का तो कभी किसी के काम का
कभी देशवासियों का तो कभी विदेशियों का
चौराहे पे पुतला क्यों फूंका जा रहा है
पुतला फूंकने की प्रेरणा शायद सबने राम से ली थी
बुराई पे अच्छाई की जीत होगी ये बात सबने कही थी
रावण बुरा था ये कहकर उसका पुतला हर साल फूंका जाता है
पर क्या कभी कोई अपने अंदर ढंग से झाँक पाता है
झाँक पातें तो शायद ऐसी मूर्खता नहीं करते
बिना सोचे समझे चौराहे पे पुतला फूंका नहीं करते।
#badwriter #K10


