" ये वही देश है, वही धरा है,

ये वही गगन है, वही चमन है,

जहाँ राम का जनम हुआ...!!

जहाँ हिमालय, भारत माँ का, भाल-मुकुट है,

और, गंगा की स्वर्णिम धारा,

दिल की अमृत बूँद है,

ये वही देश है, वही धरा है,

जहाँ राम का जनम हुआ...!!

राणा का ये राजपुताना,

इसी देश की शान है,

लक्ष्मीबाई के बुंदेला में, नारी का सिंहनाद है,

ये वही देश है, वही धरा है,

जहाँ राम का जनम हुआ...!!

ऋषियों की ये तपोभूमि है,

"नालंदा" का ज्ञान है,

इस विश्व का "विश्वगुरु", ये "भारत" मेरी जान है,

ये वही देश है, वही धरा है,

ये वही गगन है, वही चमन है,

जहाँ राम का जनम हुआ...!! "


# केदारमल वर्मा