वेदना की परिभाषा क्या लिखूँ ?

थके पाँव,भींगे और मुरझाए चेहरे

सूखे कंठ, रुंधे स्वर और टूटे हुए सपने

जीवन के अंधकार में,

निराशा रूपी हाहाकार में,

आशा की भाषा क्या लिखूँ?

~राजीव नयन