आकुलता जिसकी संगत में
अविचल बन जाए,
वही सखा अपना सच्चा है।
हृदय व्यथा जिसकी संगत में
जल बन बह जाए,
वही सखा अपना सच्चा है।
कंकड़ और कांँटों पर
जो संग-संग बढ़ जाए,
वही सखा अपना सच्चा है।
क्रोध-अगन जिसकी संगत में
शीतल बन जाए,
वही सखा अपना सच्चा है।
हर अथाह में थाह बताए,
हर भ्रम में जो राह दिखाए,
अशक्तता जिसकी संगत में
बल बन जाए,
वही सखा अपना सच्चा है।।
~राजीव नयन


