देख लिया वो,जो न कभी सोच में भी थी

आफ़ताब में भी अब धुंधली ही दिखती है!

कैसे कहूँ कि सब कुछ ठीक है यहाँ?

तुम और तुम्हारी दुनिया,बेनक़ाब सी लगती है!


~राजीव नयन