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सच कहने निकले हैं

सकुचाहट कैसी?

जब आगे बढ़ने निकले हैं,

घबराहट कैसी?

जब भय हरणे निकले हैं,

हौसले से, हर पाषाण धू

Tag: poetry और5 अन्य
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