ढूंँढ़ती हैं आँखे जब भी

फ़लक को निहारते जगमगाते तारों में,

याद आता है सिर्फ़, चेहरा तेरा।।

रुकूंँ या बढ़ूंँ इन लम्हों से आगे,

उलझ जाता हूंँ जब याद आता है 

प्यार गहरा तेरा।।

~राजीव नयन