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पेड़


मेरे अधीन फूल ,फल,पत्तियाँ या जो ज़मीन हैवो तो पूरी तरह तेरे ही नाम वसीयत कर रखी है मैंने,

फ़िर मुझसे ही गिला,शिकवा, शिक़ायत क्यों है तुझे?तकलीफ़ मुझसे कैसी, मुझसे ही अदावत क्यों है तुझे?

— राजीव नयन
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