रुकावटों का पहाड़ था,मगर मुझे आगे दिखता संसार था
ख़ामोशियाँ हो या शोर,मैं दस्तक देने जाता बार-बार था
वक़्त वो ऐसा ही था, बिल्कुल ख़्वाबों के जैसा ही था
आज तैरती हैं यादें आँखों के सामने तो
लगता है वही तो पहला- पहला प्यार था।।
~राजीव नयन


रुकावटों का पहाड़ था,मगर मुझे आगे दिखता संसार था
ख़ामोशियाँ हो या शोर,मैं दस्तक देने जाता बार-बार था
वक़्त वो ऐसा ही था, बिल्कुल ख़्वाबों के जैसा ही था
आज तैरती हैं यादें आँखों के सामने तो
लगता है वही तो पहला- पहला प्यार था।।
~राजीव नयन