मुझे न चाँद,न ही कीमती साज चाहिए,

मुझे न ही हीरों का ताज चाहिए,

बस कभी-कभी मेरा भी आभार जता देना,

अपनी बाँहों से,मेरे लिए गले का हार बना देना।।

~राजीव नयन