उन्हें लग रहा कि ये केवल शोर है,

गाँवों का जुटान राजधानी में कमज़ोर है,

कोई बताओ जाकर उनको

ये कोई यूँ ही लगी भीड़ नहीं,

हिस्से का हक़ मांगता लोकतांत्रिक ज़ोर है,

मिट्टी की संगत लिए इनमें हौसला पुरज़ोर है।।


~राजीव नयन