जब एक ने ही जलजला ला दिया,

हमें हैसियत बता दी,आईना दिखा दिया,

अभी तो दफ़्न हैं कितने ही बर्फ़ के पहाड़ों में;

सोचिए! हमारी हरकतों से जब उन्हें आज़ादी मिलेगी

तो हमारा हश्र क्या होगा?


~राजीव नयन