हलचल है,बस हलचल है !

डगमग - डगमग सुबह है, दोपहर है

शाम भी थर-थर है

हड़बड़ है, बहुत ज़्यादा हड़बड है

अनल है, नहीं कहीं जल है

हलचल है,बस हलचल है!


शोर है, घनघोर है

अपना - अपना जोर है, पुरजोर है

गड़बड़ है, बहुत ज़्यादा गड़बड़ है

ताप है, नहीं कहीं शीतल है

हलचल है,बस हलचल है!


झुंझलाहट है, बेचैनी की आहट है

डोर है,हो रही कमज़ोर है

धरफर है, बहुत ज़्यादा धरफर है

बल है,बस बल ही बल है

हलचल है,बस हलचल है!


चकमक है,पर अकबक है

होड़ है, चारों ओर है

चरमर है, बहुत ज़्यादा चरमर है

गुत्थी है,न जाने क्या हल है?

हलचल है,बस हलचल है!

~राजीव नयन