Poetry 1 min read 786.7K reads

गुजरा साल


कल के लिए क़दम तो बढ़ते हैं पर मन ठहरता है;बंद आँखों के सामने जब,गुजरा साल गुजरता है।।

— राजीव नयन
Read more Earn more Learn more