तेरी ग़रीबी का विषपान करूँगा,
तेरी लाचारी का समाधान करूँगा,
दे दो मुझे पाँच साल।
मैं तेरा ही भाई,बेटा हूँ,
सारे ज़माने को ख़ुद में समेटा हूँ,
मुझसे बड़ा मसीहा कौन?
मैं ही तेरा सारा काम करूँगा,
दे दो मुझे पाँच साल।
तुम ही ताक़त मेरी,
तुम ही इबादत मेरी,
मैं ही तेरा खेवनहार,
मुझपे बंद कर आंँखें करो ऐतबार,
मैं तेरी सेवा सुबह से शाम करूँगा,
अपना क़तरा-क़तरा तेरे नाम करूँगा,
दे दो मुझे पाँच साल।
ये तो हर पाँचवें साल दुहराते हैं आप!
बस एक चीज बोलना भूल जाते हैं आप-
कि विजय के बाद,
अपने ही आँगन को भरपूर आबाद करूँगा,
पूरे पाँच साल स्वयं का ज़िन्दाबाद करूँगा।।
~राजीव नयन


