कठिन बहुत है 'दौर'

अपने भी आजकल अकारण ही रूठ जाते हैं,

कभी-कभी व्यथा की भाव व्यक्त करते-करते

शब्दों से 'व्याकरण' छूट जाते हैं।।

~राजीव नयन