
हम कहते हैं कि वो भीड़ लगाते हैं;
जो रोज़ कमाते और रोज़ खाते हैं ।
पर ये हमें समझना होगा कि
'समाजिक दूरी' वाला शब्द उनके लिए क्या है?
जिन्होंने ज़िन्दगी भीड़ में गुज़ार दी
उनके लिए थोड़ा नया-नया है।
सरकारी राशन की दुकानों में वो भीड़ बने,
सरकारी अस्पतालों की कतारों में वो भीड़ बने,
रोजी-रोटी की खातिर परदेशी बाज़ारों में वो भीड़ बने,
Read More! Earn More! Learn More!
