वो जब हँसती है चेहरा आसमान की ओर उठा के

वसंत में निर्बाध खिलते, कुसुम-सी दिखती है,

वो जब स्पर्श करती है,नज़रें ज़मीं की ओर झुका के

मेरे हाथों में वो रिमझिम बारिश-सी लगती है,

हर मौसम को वो है स्वयं में समेटे हुए,फ़िर भी,

अपनी लगती है,मुझमें ही रहती है,नहीं बदलती है।।


~राजीव नयन