मेरे स्पर्श को तुम

मेरा नमन समझ लेना,

ऐ पेड़!

मेरे मन को तुम

अपना ही मन समझ लेना।


तेरी पत्तियों और पुष्पों की

कोमलता का कायल हूँ मैं,

तेरी टूटी टहनियों को देखकर

होता घायल हूँ मैं,

जब कभी सूख जाते हो

मेरे ही सामने तुम,तब

मेरी व्यथा को तुम

मेरी आँखों में पढ़ लेना,

मेरी उदासी को मेरी ओर से

श्रद्धासुमन समझ लेना,

ऐ पेड़!

मेरे मन को तुम

अपना ही मन समझ लेना।।

~राजीव नयन