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ज़ख्म ए जिगर


‎दिल के दहलीज पे तन्हाइयों के बाजार लगे हैं‎'जख्म-ए-जिगर' दो-चार नहीं, पूरे हज़ार लगे हैं‎‎कौशल की कशिश‎

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