एक ही सितम सनम बार- बार करते है । मेरी किस्मत को हथियार बनाते है, और मुझी पे वार करते है!   हम भी उनके वार पे सीना खोल कर खड़े है अब मौत से क्या डरना यार ,जान हथेली पर लेके चले है।।।।   ये इश्क़ जो कर लिया समझो यमराज से टक्कर ली है अजी आने दो उसे भी, आज बाते दो चार करते है।।।।।।   यमराज जी का कहना है की वो हमसे बहोत खफा है ‎क्योंकि हम उन्हें छोड़ ,बंदगी अपने यार की करते है।।।।   फिर दिल के किसी कोने से आवाज आती है मुझको डरती है मेरा हौसला तोड़ जाती है   पूछती है की जिसको खुदा किये बैठे हो वो इस लायक भी है ऐ सनम तेरे सितम की मुझे फिर याद आती है।।।