उन्होंने आज फिर मेरा दिल तोड़ा है..।। ऐसा लगा जैसे पीठ पर पड़ा एक कोड़ा है..।। कोड़े के जख्म तो धीरे - धीरे भर भी जाते..।। कहीं किसी ने आज तक टूटा दिल जोड़ा है..।।   मेरे मेसेज पर निगाह पड़ी नहीं उनकी...।। क्या मालूम जानबूझ कर अनसीन छोड़ा है..।। जानबूझ कर किया तो फिर भी सही है...।। वरना गलतफमियो ने कब किसी का घर जोड़ा है..।।   गलतफहमियों से याद आया....।।। इस रिश्ते को मैंने खूब निचोड़ा है...।। सोचा था यहां लहू होगा दोनों का...।।। वो तो अपना ले गई मेरा सुख दुख चैन-वैन सब यही गड़ा है ,गड़ा था ,गड़ा होना है...।।