कुछ कर ले ओ मुशाफिर नहीं तो ज़िन्दगी आँशु बनकर ढह जाएगी सपने भी कुछ सोच ओ मुशाफिर नहीं तो मुकद्दर भी तेरी बेवफा बन जाएगी हौसले भी रख दिल में तू  मुसाफिर नहीं तो ज़िन्दगी भी रुलायेगी कुछ तो करले ओ मुसाफिर नहीं तो ठोकर ही तुझे इंसान बनाएगी सोच तू ज़िन्दगी को ओ मुसाफिर मुकद्दर भी तुझे चलना बताएगी कुछ कहकर करले ओ मुसाफिर कहना भी तुझे ये कविवर बताएगा कुछ कर तो ले ओ मुसाफिर चलना भी तुझे मेरे दोस्त सिखाएंगे कुछ करने को चाहो अगर तो पढ़ना भी तुझे गुरुवर बतायगे कुछ करले ओ मुसाफिर नहीं तो ज़िन्दगी आसुओ ,में ढह जाएगी