हां हमने तेरी नज़रों का,

ये कमाल देखा है

शायद बना बैठे

उस खामोशी का भी, अंज़ाम देखा है

कुछ ना होने पर भी

कुछ होने का अहसास देखा है

मुश्किल है मिजाज -ए-इशक के

जो दूर रहकर भी दिल गुलज़ार देखा है

हमने तेरे ख्यालों का भी जो ख्याल देखा है

हां पास रहकर तेरी नज़रों का वो कमाल देखा है