तुम्हें भूल जाएं हम कैसे, अपने बस की बात नहीं

किसी-किसी की बात नहीं, हर चेहरा तुम सा लगता है

अपनी सुबह अपनी दोपहर अपने शामों की बात कहें क्या..

तन्हा है हर वक्त हमारा, तन्हाई की बातें हैं..

 ~ कवितांश!