देख कर तुमको अक्सर ये खयाल आता है

क्या हो तुम, कौन हो, क्यूं हो तुम?

क्या तुम कभी मेरी हो सकोगी?

अगर हँ तो कैसे और अगर नही तो क्यूं?

~कवितांश!