नया है, नया है, सब कुछ नया है जलकुंभीयों की सेज पर पंक्षियों का कुन्मूँनाना किनारों का बार-बार यूँ पास बुलाना लहरों का हर बार गले लगाना इस क्षणिक मिलन में कुछ तो नया है नया है, नया है, सब कुछ नया है। नर्म पगडंडियों पर दूर निकल जाना फ़सलों का दुलार से मुसाफ़िरों को सहलाना कभी हाथो को चूमना, कभी पैरों से लिपट जाना उसके स्पर्श में कुछ तो नया है नया है, नया है, सब कुछ नया है। बनज़ारे बदलों का उमड़-घुमड़ आना अभी रुई के फाहों सा क्षण में रंगोली हो जाना चाँदनी रातों में स्नेह निरझर बरसना भीगे आग़ोश में प्रिये के संग भीगने में कितना मज़ा है नया है, नया है, सब कुछ नया है।