
प्रकृति तू मेरा बचपन, मेरा गाँव है
कच्ची टिकोलों सी यादें
थोड़ी खट्टी थोड़ी सी मीठी
अब तो मकानों के बीच थोड़ी प्रकृति बची है
मेरा गाँव तो खूबसूरत प्रकृति में है
कई ताल और उन में नहाते पंछियों का जोड़ा
साबन के आने से सारा गाँव धूल जाता था
हवा ऐसी की मन खिल जाता था
दूर तलक खेत, उन खेतों की खुशबू याद है
मिट्टी के घरौंदे, मिट्टी के खिलौनें,मिट्टी में खेल
पेड़ पर चढ़ कर तितलियों की बाते
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