यहाँ बड़ा सा घर है मेरा, कपडे भी अब ब्रांडेड लाती हूँप्रदूषण से बहुत दूर हूँ, अब मैं NRI कहलाती हूँ


अब मुझे सलवार कम जीन्स ज़ादा भाता हैयह फोरेनर वाला लुक मुझे बहुत रिझाता है

पंजाबी जुत्ती नहीं अब लैदर शू है मेरे पास

ऑडी mercedes से तो जी नीचे नहीं होती यहाँ कोई भी बात

वो बिलकुल सपनो वाली दुनिया है ये

बड़ी बड़ी बल्डिंग, साफ सड़के, सब तरफ हरियाफिल्मो जैसे घर, कैलेंडर वाले कुत्ते, शहर नहीं मानो कोई दुनिया हो ख़यालीजहाँ देखो बेहतरीन नज़ारा ही नज़र आता है

पता नहीं फिर भी ये देश क्यों मुझे रास नहीं आता है

सीटुएशनल रिश्ते बना लिए है कुछ, पराया को अपना बुलाती हूँ

लेकिन खुश बहुत हूँ, NRI जो कहलाती हूँ

 

न वो बाजार यहाँ ना वो सामान

न वो अपनापन यहाँ न वो आसमान

पानी बिसलेरी जैसा साफ़ है यहाँ, पर घर बुला पिलाता कोई नहींसाफ़ हवा तो है, पर छतो पे पतंगे उडाता कोई नहीं

पेड़ बहुत है यहाँ पर छाव अपनी सी नहींट्राफ्फिक तो ज़ादा नहीं ,पर शान्ति अपने गांव सी नहीं

सुबह बेहद सुन्दर है , पर चाय की महक नहीं काफी की कड़वाहट हैदुनिया 6 बजे शुरू हो जाती है, फिर भी अकेलेपन की झटपटाहट है

रेड लाइट पर गाड़िया तो दिखती है सड़को पर लोग नहीऔर जो दिख जाए तो अपने से नहीं

भावनाये पहचान नहीं पाती यहाँ ,

क्योकि वो मुस्कान अपनी नहीं

यहाँ त्योहारों के गीत नहीं कार्निवल्स और rhymes होता है

खुशियां जताने पर अच्छा खासा फाइन होता है

कभी अंग्रेज़ी भाषा का दम भरने वाली मैंआज अपनी ज़बान मैं दिल का हाँ सुनाती हूँ

लेकिन खुश बहुत हूँ, NRI जो कहलाती हूँ


यहाँ घरो मैं तुलसी और मनी प्लांट के पौधे तो है

पर आँगन वरांडा नहीं, बैकयार्ड होता है

लोग आमंत्रित करे तभी जाना होता है,

बिना बुलाये घर जाना, awkward होता है

वैसे कुछ इंडियन एसोसिएशन और कल्चरल क्लब है

वतन सी फील लेना का पूरा बंदोबस्त है

पर जब त्यौहार आते है तब मुझे घर की बहुत याद आती है

वैसे मैं रोती नहीं हूँ , बस आँखे छलक जाती है

जब मेरा टीका भाई के माथे पे मेरी बहन करती है

और उसकी कलाई पर बंधी मेरी वाली राखी की फोटो आती है

कहाँ ना रोती नहीं मैं, बस आँखे छलक आती है


यहाँ अपने ही अपनों से भागते है

रिश्तो की गरिमा को सामाजिक शिष्टाचार से नापते है

जो जड़ें हमारी नहीं उन्हें अपनाना चाहते हैउधार की ज़मीन पर अपनी फसल उगाना चाहते है


विदेश की सभी ढंग दिल से अपना रही हूँ

संस्कारो को बचाते हुए यहीके रंगो मे रंगी जा रही हूँ

ना बहन का साथ है ना सहेली का हाथ

तो क्या हुआ, पैसे तो कमा रही हूँ


दश्हरा हो या दूज , मैं सारे फ़र्ज़ निभाती हूभांजे का जनम

बहन का रोका

पापा का रिटायरमेंट

या बाबा की बरसी

फ़ोन पर अपनी अटेन्डन्स ज़रूर लगाती हूहोली, दिवाली, शादी या अंनिवर्सरी

वीडियो कॉल पर , सब इसी सोफे पर बैठ के मानती हूँ

लेकिन खुश बहुत हूँ, NRI जो कहलाती हूँ


दुनिया में कामयाब रिश्तो के फ़कीर है वोज़रुरत और सपनो की बीच की लकीर है जो

हाई स्टैडर्ड ऑफ़ लिविंग, अनदेखी तन्हाइयो से मिला है जिन्हेनयी नागरिकता पाकर अपना वजूद खोने के करीब है वो

खुद ही के देश में विदेशी,यहाँ इंडियन कहलाते है

अपना अस्तित्वे चाह कर भी जान नहीं पाते है

अपने गम को देश के पिछड़ेपन से सहलाते हैयही वो किस्मत के धनी है जो NRI कहलाते है 


youtubelink:


https://youtu.be/tYZ5HNP85nM