तेरी आवाज़ से दिल की मेरे धड़कन धड़कती हतेरी साँसे मेरे हर साज मे आवाज़ भर्ती हैदीदार इ यार होगा या नहीं है इलम न मुझको

मेरी शामे तेरा हर रोज़ इंतज़ार करती ह 

मुझे तू आफ़ताब मत समझ लेना की ढल जाऊ

मैं मौसम भी नहीं जो, थोड़ी देर मैं बदल जाऊमैं तो वो उन्स हु, महरूम जो तेरी मोहब्बत से

तेरी खातिर ये दौलत क्या , मैं रूह भी नाम कर जाऊ

तेरे होने की आहट ही, मेरे ज़ख्मो का मरहम हैतेरे दीदार की ख्वाहिश ही बस जीना का मक़सद हैमिले खुशिया तुजे हर बार मेरी हर दुआ बोले

नसीबो की लिखावट मे मेरे बस यार फुरक़त है

मुलाकाते तो दूर, लफ्ज़ है कायदो के परतोmein

 तुजे पाने की हसरत है मुझे भी खूब शिद्दत से

मेरे इस पाक इश्क़ को जूनून तू न समझनातेरा दीदार hi bas अब मेरे ख्वाबो की क़ुरबतहै

है आरजू मेरी एक बार के , जी भर तुजे देखूँ

तेरी आँखों में अपने प्यार की वो एक लहर देखूँ

तू कहती है तुजे भी इश्क़ है मुझसे मुक़द्दस साब्यान इ इश्क़ की ये इन्तेहाँ मैं बेइन्तेहाँ देखूँ

यूँ तो क्या चीज़ है तेरे मेरे ये बीच दायरामहज़ बनता नहीं कोई कविता से यु शायरा

खुदा दीदार इ यार हो अब बस है ये इल्तिज़ा अनकहे एहसासो का खुदा जाने ये सिलसिला


फन्ना होने से पहले उसका बस दीदार हो जाए

दुआ ये है मेरे काफिर को भी अब प्यार हो जाए

गुजरिश एक है बस वो की मेरा नाम न भूले

कफ़न में न मेरी तस्कीन  ज़ार ज़ार हो जाएा

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