देह के भस्म हो जाने से मृत्यु नहीं होती

मृत्यु तो वसूलों का भस्म हो जाना है

मैं जीता रहूंगा तेरे साथ तब तक

जब तक मेरे सपनों का सागर जिंदा है

मुझे याद करने वाला सौदागर जिंदा है।


मेरा होना और मेरी मृत्यु होने में अंतर बस इतना होगा

कि तुम सोचते हो कि मैं जिंदा हूं

कि तुम सोचते हो कि मैं मर गया

वैसे तो मैं साथ हमेशा था तुम्हारे

कभी आवाज बनकर ,कभी जज्बात बनकर

सामने तो कभी-कभी ही आता था

ज्यादा तो दूरी से ही रिश्ता निभाता था।


पैसों का क्या है, मैं था तब भी मिलते थे

मैं नहीं हूं तब भी मिलते रहेंगे

दुनिया के लोग भी

मौसम की तरह रुख बदलते रहेंगे।


तुम्हारे लिए अगर मेरी आवाज जिंदगी है तो वह रिकॉर्ड है,सुनते रहना

मेरे वसूल जिंदगी है तो उन पर चलते रहना

मृत मेरी मृत्यु चाहे कभी भी हो यह मायने नहीं रखता

मेरी मृत्यु तो तब होगी जब तुम मुझे भुला दोगे

मेरी यादों को मिटा दोगे

बातें जो कही है, ना मानोगे

सब वसूल भुला दोगे।


मेरे जीते जी भी मेरी मृत्यु ही समझो

अगर तुमने मुझसे दूरी बना ली

मेरे अरमानों की बलि चढ़ा दी

अपना होने के बावजूद

परायों की भांति हमसे नजरें चुरा ली ।