मां चरणों की मैं तेरी धूल

कर तू मुझे कुबूल

हूं मैं तेरी दासी

तेरी सेवा कि मैं अभिलाषी।

चाहती हूं करना पुष्प मैं अर्पण

चाहे नहीं देखा मैंने हो दर्पण

हूं मैं तेरे चरणों में समर्पण।

नृत्य करूं संगीत करूं

तेरी ख्याति मैं फैलाऊं

तेरी महिमा के गुण गाऊं

दो पल मेरी जिंदगी के तेरी सेवा में बिताऊं।


तुम मेरी जन्मदाता है

तेरा हर रूप मुझको भाता है

तूने मेरी रक्षा के जब भी मैंने इच्छा कि।


मेरा मन तेरा दरबार है

मुझे तेरी भक्ति पर एतवार है

तू चाहे तो प्रलय कर दे

सृष्टि तो तेरा प्यार है।