पेड़ों की ओट में सूरज छिप रहा है.. ये पानी भी सोने सा दिख रहा है.. एक पंछी अपने कोटर को चला है.. ऊपर दमकता बादल,धीरे से पिघल रहा है.. यही कहीं छिपा सा,हमारा खुदा रहता है.. हसीन शाम है फिर भी, वो हमसे जुदा रहता है...