दीपावली हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिन्दू त्यौहार है! दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है! दीपावली भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। दीपावली दीपों का त्योहार है। आध्यात्मिक रूप से यह 'अन्धकार पर प्रकाश की विजय' को दर्शाता है! आइए पढ़ते है आपके पसंदीदा लेखकों को वो अपनी कलम से दीपोत्सव कैसे मानते है :
जब जब घिरे अंधेरे गहरे जग ने तुम्हें पुकारा राम,
एक तुम्हारे होने भर से जग भर में उजियारा राम !
धन दौलत की या ताक़त की जिन पर लंका हैं उनके,
होंगे लाख सहारे, दुखियों का बस एक सहारा राम !
- कुमार विश्वास
मैं दीया हूँ एक नन्हा
मैं भटक गया हूँ कहीं पर
शहरों की रोशनी में
चुंधिया रहीं हैं आंखें
मुझे रास्ता दिखा दे
मुझे मैं से तू मिला दे
तू पकड़ के हाथ मेरा
किसी झोपड़ी में रख दे
- प्रताप सोमवंशी
झिलमिलाते हुए दिन-रात हमारे लेकर,
शाम आई है हथेली पे सितारे लेकर.
रात लाई है सितारों से सजी कंदीलें,
दिन भी आया है धनक वाले नज़ारे लेकर.
- आलोक श्रीवास्तव
इन अंधेरों को चिराग़ों की नज़र लग जाए न
ये अंधेरे घर में आए हैं बड़ी ख़िदमत के बाद
- हरिओम
फिर हो कूच असुर मर्दन को, फिर शक्ति पूजन हो
सद् की सीता हरने वाले का फिर मान दलन हो
दनुज-दंभ सीमा लाँघे तो हनुमत उसे जलाएं
राम अवध में आएं तो - हम भी त्यौहार मनाएं।।
- अतुल कनक
शोर नहीं, प्रकाश हो
प्रदूषण का नाश हो
मिट चुकी संत्रास हो
उजासित हर आस हो
ये दीवाली इतनी ख़ास हो !!
- डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी
धुआँ धुआँ है फज़ा रौशनी बहोत कम है
सभी से प्यार करो जिंदगी बहोत कम है
- शकील आज़मी

