[Kavishala Social] मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को हुआ था। एक अभिनेता के रूप में उन्होंने बॉलीवुड को कई ऐसे फिल्में दी और कई ऐसे किरदार निभाए, जो अमर हो गए। मनोज कुमार ने देशभक्ति की भावनाओं से लबरेज कई फिल्मों में काम किया। इसीलिए उन्हें भारत कुमार भी कहा गया। हिंदी फिल्म जगत में मनोज को एक ऐसे बहुआयामी कलाकार के रूप में जाना जाता है जो फिल्म निर्माण की प्रतिभा के साथ- साथ लेखन, संपादन, बेजोड़ अभिनय और देशभक्ति आधारित फिल्मों में खास भूमिकाओं के जरिए आज तक दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं। मनोज कुमार का पूरा नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी है!

भारत सरकार द्वारा साल 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

2015 में उन्हें हिंदी फिल्मों में योगदान के लिए 'दादा साहब फाल्के अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया गया।

उनकी फिल्म 'उपकार' सुपरहिट रही। फिल्म 'उपकार' के विषय में एक रोचक तथ्य यह है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने मनोज कुमार को 'जय जवान जय किसान' नारे पर फिल्म बनाने को कहा था। उनकी बात मानते हुए मनोज कुमार ने 'उपकार' फिल्म बनाई। फिल्म हिट रही और इसके गाने तो आज तक लोग गुनगुनाते हैं। भारत कुमार के जन्मदिन के अवसर पर पेश है उनकी फिल्मों के कुछ चुनिंदा गीत- 

1970 में बनी फिल्म 'पूरब और पश्चिम' के लिए इंदीवर का लिखा गीत- दुल्हन चली, ओ पहन चली, तीन रंग की चोली... बहुत लोकप्रिय हुआ। इसे गाया था महेन्द्र कपूर ने और संगीत से सवांरा था- कल्याणजी- आनंद जी ने। 

दुल्हन चली, ओ पहन चली, तीन रंग की चोली

बाहों में लहराये गंगा जमुना, देख के दुनिया डोली

दुल्हन चली, ओ पहन चली ...


ताजमहल जैसी ताजा है सूरत

चलती फिरती अजंता की मूरत

मेल मिलाप की मेहंदी रचाये

बलिदानों की रंगोली 

दुल्हन चली ...


1970 में ही एक और फिल्म बनी थी- यादगार। इस फिल्म का गीत- इक तारा बोले...भी बहुत लोकप्रिय रहा। आज भी लोग जब महेन्द्र कपूर की आवाज में ये गीत सुनते हैं तोगीत के बोल में खो जाते हैं। वर्मा मलिक के लिखे इस गीत को गाया था महेन्द्र कपूर ने और संगीत दिया कल्याणजी- आनंद जी ने- 

इक तारा बोले टून टून क्या कहे ये तुमसे, सुन सुन 

इकतारा बोलो टून टून क्या कहे ये तुमसे, सुन सुन

बात है लम्बी मतलब गोल


1968 में आई फिल्म 'आदमी' में गीतकार शकील बदायुनी का लिखा गीत- कारी बदरियां, मारे लहरिया..भी बहुत हिट हुआ। लता जी की आवाज थी और संगीकार थे नौशाद- 

कारी बदरिया, मारे लहरिया, मोरा जियरा उड़ा जाए रे

धीरे से चल अरी बैरी पवन मोरा गोरा बदन खुला जाए रे

भीगा भीगा मौसम ये दिन अलबेले

जिया नहीं लागे सावन में अकेले

पी की पुकार करे पापी पपीहा

मोरे दिल को बेदर्दी जलाए रे


कली कली भँवरा जो डोलन लागे

मीठी मीठी पीड़ा करेजवा में जागे

मनवा को थाम यही सोचू मैं राम 

कोई मोरी नगरिया बसाए रे


फिल्म 'सावन की घटा' 1966 में बनी थी। इस फिल्म में एस. एच. बिहारी के लिखे गीत और ओ.पी. नैयर के संगीत से सजे- हौले-हौले साजना धीरे-धीरे बालमा..आशा भोसले की आवाज में बहुत लोकप्रिय हुआ। 

हौले-हौले साजना धीरे-धीरे बालमा

ओ हो हो हो, हो हो ...

ज़रा हौले-हौले चलो मोरे साजना

हम भी पीछे हैं तुम्हारे

कैसी भीगी-भीगी रुत है सुहानी, 

कैसे प्यारे नज़ारे

ज़रा हौले-हौले ...


1976 में बनी फिल्म 'सन्यासी' का गीत- चल सन्यासी मंदिर में आज भी लोगों की जबान पर है। इस गीत को लिखा था विश्वेस्वर शर्मा ने और संगीत दिया शंकर-जयकिशन ने। लता मंगेस्कर और मुकेश की आवाज में यह गीत मनोज कुमार और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया-  


चल सन्यासी मंदिर में, तेरा चिमटा मेरी चूड़ियाँ

दोनों साथ बजाएंगे, साथ-साथ खनकाएंगे

क्यूँ हम जायें मंदिर में, पाप है तेरे अंदर में

लेकर माला कंठ दुशाला राम नाम गुन गायेंगे

रेशम सा ये रूप सलोना यौवन है या तपता सोना

ये तेरी मोहन सी सूरत कर गई मुझपे हाए जादू-टोना

कैसा जादू-टोना, सारी मन की ये माया है

तुम पे देवी किसी रोग की पड़ी विकट छाया है

चल सन्यासी मंदिर में, तेरा कमंडल मेरी गगरिया

साथ-साथ छलकायेंगे, क्यूँ हम जायें मंदिर में

पाप है तेरे अंदर में -


(Reference from Amar Ujala)