जब सजी बसंती बाने में

बहनें जौहर गाती होंगी

क़ातिल की तोपें उधर

इधर नवयुवकों की छाती होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

जब पतझड़ पत्तों-सी विनष्ट

बलिदानों की टोली होगी

जब नव विकसित कोंपल कर में

कुंकुम होगा, रोली होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

युग-युग से पीड़ित मानवता

सुख की साँसे भरती होगी

जब अपने होंगे वन उपवन

जग अपनी यह धरती होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

जब विश्व-प्रेम मतवालों के

ख़ूँ से पथ पर लाली होगी

जब रक्त बिंदुओं से सिंचित

उपवन में हरियाली होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

जब सब बंधन कट जाएँगे

परवशता की होली होगी

अनुराग अबीर बिखेर रही

माँ बहनों की झोली होगी

तब समझूँगा आया वसंत।