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तब समझूँगा आया वसंत - शिवमंगल सिंह सुमन

जब सजी बसंती बाने में

बहनें जौहर गाती होंगी

क़ातिल की तोपें उधर

इधर नवयुवकों की छाती होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

जब पतझड़ पत्तों-सी विनष्ट

बलिदानों की टोली होगी

जब नव विकसित कोंपल कर में

कुंकुम होगा, रोली होगी

तब समझूँगा आया वसंत।

युग-युग से पीड़ित मानवता

सुख की साँसे भरती होगी

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