अचानक कितना सुन्दर हो गया था सूर्यास्त  

यहीं, बिल्कुल यहीं, और हर कहीं 

छत के ऊपर और पार उसके 

शाम गुलाबी, नारंगी बादल 

आकृतियां, अजान, अनाम रंगों की 

सिमटती, बिखरती, मचलती, विचरती 

अकल्पित सौंदर्य की कला कृतियों का आसमान 

प्रेमी सा, पूज्य सा, आराधना और आराध्य भी 

सपनों की घुड़दौड़ का सा आकाश


देखा उन्होंने, खींची तस्वीरें, लगाए शब्दों के अम्बार 

खूबसूरत, लेकिन अट्टालिकायें तारों और कागज़ों की 

वे कैद थे घरों के भीतर 

नाखून से छोटे एक वायरस ने 

हिरासत में ले रखा था आदमी को 

रुके हुए थे उसके वाहन 

बंद तेल के कुंए और बाज़ार प्रकृति ने खोली थी अपनी मुट्ठी 

खोले थे अपने केश 

रंगे थे अपने पाँव 

अनंत काल के बाद

तांडव नृत्य किया था सृष्टि ने 

शंकर ने बजाया था डमरू 

और क्षीर सागर पर लेटे 

मुस्कुरा रहे थे विष्णु 

मदमस्त था शेष नाग


फिर मनुष्य ने किये आविष्कार 

आविष्कार ही आविष्कार 

विज्ञानं ने बचाई जान 

हुआ कल्याण, शंकर ने कहा तथास्तु 

किन्तु यह क्या? वे फिर निकल पड़े उन्मादी भीड़ बनकर 

विशाल हुजूम, बड़ी तादाद में और खो गया सूर्यास्त 

अगले प्रलय तक! 



[पंखुरी सिन्हा]



बिहार की युवा लेखिका, दो हिंदी कथा संग्रह ज्ञानपीठ से, 5 हिंदी कविता संग्रह, दो अंग्रेजी कविता संग्रह। कई किताबें प्रकाशनाधीन। कई संग्रहों में रचनाएं संकलित हैं, कई पुरस्कार जीत चुकी है--कविता के लिए राजस्थान पत्रिका का 2016 का पहला पुरस्कार, कुमुद टिक्कू कथा पुरस्कार 2020, मथुरा कुमार गुंजन स्मृति पुरस्कार 2019, प्रतिलिपि कविता सम्मान 2018, राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड 2013, पहले कहानी संग्रह, 'कोई भी दिन', को 2007 का चित्रा कुमार शैलेश मटियानी सम्मान, 'कोबरा: गॉड ऐट मर्सी', डाक्यूमेंट्री का स्क्रिप्ट लेखन, जिसे 1998-99 के यू जी सी, फिल्म महोत्सव में, सर्व श्रेष्ठ फिल्म का खिताब मिला, 'एक नया मौन, एक नया उद्घोष', कविता पर,1995 का गिरिजा कुमार माथुर स्मृति पुरस्कार, 1993 में, CBSE बोर्ड, कक्षा बारहवीं में, हिंदी में सर्वोच्च अंक पाने के लिए, भारत गौरव सम्मान. अंग्रेजी लेखन के लिए रूस, रोमानिया, इटली और नाइजीरिया द्वारा सम्मानित। कविताओं का देश और दुनिया की बाइस से अधिक भाषाओँ में अनुवाद हो चुका है!