देश के प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में सभी विद्यार्थी मन रहे है, सोसिल मीडिया पर हल्ला है बेरोजगारी को लेकर जिस पर देश के जाने माने कवियों और लेखकों ने भी अपनी आवाज दी! आइये पढ़ते हैं क्या कहते है देश के लेखक व् कवि:
कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये
— Kavishala (@kavishala) September 17, 2020
कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये
- दुष्यंत कुमार
जी वो राजा की दाढ़ी वाले गीत की धुन पूछ रहे थे बहुत लोग।जी उसे इस धुन में गाएँ।जय हो। pic.twitter.com/Oc1SbOzQkw
— Nilotpal Mrinal (@authornilotpal) September 17, 2020
इसलिए समय के सैलाबों को मत रोको
— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) September 17, 2020
बेचैन हवाओं में न खिड़कियाँ बंद करो,
हर किरन ज़िंदगी के आँगन तक आने दो
नवनिर्माणों की गति को अब स्वच्छंद करो
यदि बाँध बांधने से पहले जल सूख गया
धरती की छाती में दरार पड़ जाएँगीं#राष्ट्रीय_रोजगार_दिवस#बेरोजगार_दिवस #राष्ट्रीय_बेरोजगारी_दिवस
बेरोजगारी के आलम में थरिया पीटत बानी...
— Neha Singh Rathore (@NehaFolksinger) September 17, 2020
बिहार से बेरोजगार बोलत बानी.#बेरोजगारी_दिवस #nehasinghrathore #dharohar pic.twitter.com/jdOle2kVNv
हर और एक ही समाचार है
— Haneef Shikohabadi✍ (@Er_Wr_Haneef) September 17, 2020
देश का युवा बेरोज़गार है
हर सिम्त एक कोहराम मचा
पर दिखता नहीं हाहाकार है
एक एग्ज़ाम करा नहीं पाते,
कि पूरा सिस्टम ही बेकार है#हनीफ़_शिकोहाबादी ✍️#NationlUnemploymentDay#राष्ट्रीयबेरोजगारदिवस@kavishala @Kavishala_Hindi https://t.co/Cw1hXeJPaT

